योगीराज अनंत महाप्रभु जी के जयंती महोत्सव का द्वितीय दिवस: वेद पाठ से गूंजा आश्रम, अनंत महाप्रभु जी की गुफा पर हुआ विशेष पूजन
देवरिया।अनंत पीठ आश्रम बरहज के पावन प्रांगण में चल रहे पूज्य पाद योगीराज अनंत महाप्रभु जी के भव्य जयंती महोत्सव के दूसरे दिन आज, शुक्रवार को प्रातः कालीन सभा में भक्ति, ज्ञान और अनुष्ठान की त्रिवेणी बही।
अनंत महाप्रभु जी की गुफा पर विशेष पूजा-अर्चना
महोत्सव के इस विशेष द्वितीय दिवस पर योगीराज अनंत महाप्रभु जी की पावन गुफा पर आश्रम बरहज के पीठाधीश्वर पूज्य गुरुदेव आञ्जनेय दास जी महाराज के सौजन्य से अनंत चतुर्दशी की मुख्य पूजा पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान में संतों और यजमानों ने विश्व कल्याणार्थ पूजा अर्पण किया। गुफा परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां दर्शन और पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहा।
वेद पाठ और मंगलाचरण से सभा का प्रारंभ
प्रातः कालीन वैचारिक सभा का प्रारंभ मुख्य उद्घोषक पं. परशुराम पाण्डेय द्वारा सुमधुर मंगलाचरण से हुआ। इसके तुरंत पश्चात संस्कृत महाविद्यालय के विद्वान प्राचार्य गणों द्वारा सस्वर वेद पाठ किया गया। वेद ध्वनियों के पावन स्वर से पूरा आश्रम परिसर गुंजायमान हो उठा।
ब्यास पीठ से गूंजा राम अवतार का दिव्य दर्शन
इस सत्र में छपरा (बिहार) से पधारे प्रख्यात विद्वान श्री विद्याभूषण जी महाराज ने "प्रभु श्री राम का अवतार क्यों हुआ?" विषय पर मुख्य प्रवचन दिया। उन्होंने रामचरितमानस की सुप्रसिद्ध चौपाई—"जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥
तब तब धरि प्रभु बिबिध शरीरा। हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥" का अत्यंत मार्मिक प्रतिपादन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज में अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भक्तों के संकटों को हरने और मानवता की रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
देशभर से आए संतों ने किया मानस रसपान
कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या धाम से पधारे श्री नरहरि दास जी महाराज ने प्रभु श्री राम की दिव्य बाल लीलाओं की सरस प्रस्तुति दी। वहीं, मुंबई (महाराष्ट्र) से आईं श्रीमती कात्यायनी तिवारी ने मातृशक्ति और अध्यात्म के अंतर्संबंधों पर विचार रखे।
इसके साथ ही अम्बेडकर नगर से श्री राम शरणदास जी, बलिया से बालानन्द जी, मीरजापुर से श्री श्यामल मिश्रा जी एवं मऊ से पं. हरिओम शरण जी ने ब्यास पीठ से अपनी ओजस्वी वाणी में सत्संग के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विनय मिश्र किया गया। इस आध्यात्मिक समागम में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
























































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