राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: 73,480 पन्नों का पुलिंदा, 105 वारदातें और 173 गवाह; पुलिस ने कोर्ट में दाखिल किया शिकंजा
अयोध्या।अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में आस्था के चढ़ावे पर डाका डालने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कानूनी कार्रवाई का सबसे बड़ा शिकंजा कस दिया है। पुलिस की एसआईटी (विशेष जांच टीम) ने शुक्रवार को फैजाबाद (अयोध्या) की जिला एवं सत्र अदालत में 73,480 पन्नों की एक ऐतिहासिक चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की। करीब 105 फुटेज क्लिप्स और 173 पक्के गवाहों के बयानों से सजी यह चार्जशीट मंदिर के काउंटिंग रूम में चले लंबे 'सिंडिकेट खेल' की पूरी कुंडली बयां करती है।
सूत्र से खुलासा: कमर में टेप चिपकाकर और विशेष जेबों में छुपाते थे गड्डियां
जांच से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, दान गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) में तैनात कर्मचारियों ने चोरी का एक पूरा सिस्टम बना रखा था।
विशेष रूप से तैयार कपड़े: सूत्र बताते हैं कि आरोपी कर्मचारी ड्यूटी पर आने से पहले ढीले-ढाले कपड़े और अंदरूनी हिस्सों में विशेष रूप से बनी चोर-जेबें (इनर पॉकेट्स) पहनकर आते थे।
कमर पर नोट चिपकाने का तरीका: कैमरों की नजर से बचने के लिए कई आरोपी नोटों की गड्डियों को अपनी कमर, जांघों और मोजों में छिपा लेते थे।
रकम का बंदरबांट: सूत्रों का दावा है कि रोजाना गिनती खत्म होने के बाद बाहर निकलकर इस चोरी की रकम का आपस में बंटवारा कर लिया जाता था।
4 जून से 5 जून: वह 24 घंटे जिसने हिलाकर रख दिया
मामले की शुरुआत 4 जून, 2026 को हुई, जब मंदिर ट्रस्ट के ही एक जागरूक कर्मचारी आनंद कुमार चौधरी की नजर इस गड़बड़ी पर पड़ी।
4 जून: आनंद चौधरी ने लाइव चोरी देखी -> मोबाइल से वीडियो बनाया -> चंपत राय को भेजा
•5 जून: चंपत राय अयोध्या लौटे - ट्रस्टियों की आपात बैठक -CCTV की गहन जांच
•इसके बाद: पुलिस में औपचारिक शिकायत - SIT का गठन -73,480 पन्नों की चार्जशीट
चौधरी की सतर्कता: आनंद चौधरी ने न केवल अपनी आंखों से नोटों को गायब होते देखा, बल्कि चुपके से इसका एक वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दी। चौधरी ने शुरुआती आशंका में ही जता दिया था कि इसमें आउटसोर्सिंग और स्थाई मिलाकर लगभग 67 कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
5 जून की हाई-लेवल मीटिंग: 4 जून को चंपत राय अयोध्या से बाहर थे। 5 जून को लौटते ही उन्होंने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और डॉ. नरेंद्र के साथ बंद कमरे में आपात बैठक की। जब कंट्रोल रूम के हाई-डेफिनेंशन CCTV फुटेज प्ले किए गए, तो उसमें कर्मचारियों के हाथ की सफाई साफ दिखाई दे गई।
चार्जशीट के वो 4 बड़े बिंदु जिन पर टिका है केस
*73,480 पन्नों का विशाल पुलिंदा: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई बक्सों में अदालती दस्तावेज दाखिल किए हैं। इसमें आरोपियों के बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और चैट हिस्ट्री शामिल है।
105 डिजिटल सबूत (CCTV वारदाते): मंदिर परिसर और दान कक्ष में लगे 360-डिग्री कैमरों की महीनों पुरानी रिकॉर्डिंग खंगाली गई। जांच टीम को कुल 105 ऐसी स्पष्ट घटनाएं मिलीं, जहां नोटों की गड्डियां गायब की जा रही थीं।
173 गवाहों की गवाही: मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए 173 लोगों के बयान (Section 161/BNSS) दर्ज किए गए हैं। इनमें मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, बैंक अधिकारी और काउंटिंग टीम के सदस्य शामिल हैं।
नेटवर्क और रिकवरी: पुलिस सूत्रों के अनुसार, चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख है कि चुराए गए पैसों को कहां ठिकाने लगाया गया और अब तक आरोपियों के पास से कितनी बरामदगी की जा चुकी है।
अदालती प्रक्रिया की तैयारी: अभियोजन पक्ष के सूत्रों का कहना है कि इतने पुख्ता और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के लिए ज़मानत पाना बेहद मुश्किल होगा। पुलिस ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी फास्ट-ट्रैक सुनवाई की जाए।


























































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