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कृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य कथा सुन झूम उठे श्रद्धालु

 देवरिया।बरहज तहसील के ग्राम पुरैना शुक्ल में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा स्थल भक्ति और अध्यात्म के अनूठे संगम का गवाह बना। सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉक्टर मनमोहन मिश्र ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया, पूरा पंडाल 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए डॉ. मिश्र ने प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से बताया कि ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं। उन्होंने कहा, "हिरण्यकश्यप जैसा अहंकार अंततः विनाश को प्राप्त होता है, जबकि प्रह्लाद जैसी निश्छल भक्ति पत्थर से भी परमात्मा को प्रकट करने की शक्ति रखती है।" इसके पश्चात गजेंद्र मोक्ष के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने समझाया कि जब जीव संसार के मोह-माया से हारकर पूर्णतः प्रभु की शरण में जाता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं।कथा के क्रम में राजा बलि के प्रसंग और वामन अवतार की चर्चा करते हुए व्यास जी ने बताया कि दान और त्याग ही मनुष्य को महान बनाता है। उन्होंने भगवान श्री राम के आदर्श चरित्र का वर्णन करते हुए समाज को मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि श्री राम का जीवन एक संपूर्ण संविधान है, जो हमें रिश्तों और धर्म की मर्यादा सिखाता है।कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्री कृष्ण का जन्म रहा। डॉ. मिश्र ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म कंस जैसे आततायी के विनाश और संसार में प्रेम की स्थापना का प्रतीक है। 
इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से सुमित्रा देवी, सत्यप्रकाश शुक्ल, रामप्रकाश शुक्ल, हरिहर शुक्ल, जयशिव शुक्ल और आशुतोष शुक्ल के साथ साथ न केवल पुरैना शुक्ल बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।


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