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श्रीमद्भागवत कथा का हुआ दिव्य श्रवण, व्यासपीठ से बोले पं. अतुल कृष्ण शास्त्री— ‘प्रेम धनवान को निर्धन नहीं होने देता’

कादीपुर सुल्तानपुर ।करौंदी कला के हरीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को पवित्र वातावरण में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सागर उमड़ पड़ा। कथा व्यासपीठ से श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित अतुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण, मनन से जीवन के सारे पाप, ताप और संताप मिट जाते हैं। व्यक्ति को सदैव धर्मानुसार आचरण करना चाहिए।”

उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा का आदर-सत्कार कर यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम का धन है, वह निर्धन नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण अपने हाथों से धोकर मित्रता का धर्म निभाया और संसार को समानता का संदेश दिया।

कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से ही पाप पुण्य में परिवर्तित हो जाते हैं। जब व्यक्ति के विचार बदलते हैं तो उसके आचरण में भी परिवर्तन आ जाता है। उन्होंने कहा कि अन्य ग्रंथ मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाते हैं, परंतु श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को मरना सिखाती है। जैसे भगवान शुकदेव ने राजा परीक्षित को तक्षक सर्प के डंसने से पहले ही भागवत ज्ञान देकर मोक्ष प्रदान किया।

इस दौरान कथा स्थल पर सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

कार्यक्रम में यजमान हृदयराम उपाध्याय (लाला) ने व्यासपीठ का माल्यार्पण किया। इस अवसर पर महेंद्र उपाध्याय, सुरेंद्र कुमार, रवींद्र उपाध्याय, शेषनाथ मिश्रा, नीरज उपाध्याय, धीरज उपाध्याय, आनंद उपाध्याय, सोनू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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